irshya tu na gayi mere man se | Class 10 Non Hindi इर्ष्या तू न गई मेरे मन से

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Bihar Board Class 10th Non Hindi Chapter 10 irshya tu na gayi mere man se

पाठ – 10
लेखक – रामधारी सिंह दिनकर
शीर्षक – इर्ष्या तू न गई मेरे मन से

1. वकील शाहब सुखी क्यों नहीं है ?

उत्तर – वकील साहब इसलिए सुखी नहीं है,, क्योकि उन्हें अपने आप के सुख सुविधा से संतुष्ट नहीं है,, उसके बगल वाले पड़ोसी के पास दुनिया की हर ऐसा आराम उपलब्ध है,, वे बीमा एजेंट है,, उसके पास मोटर कार है,, और अच्छा बँगला है,, लेकिन वकील साहब के पास ये सब चीझो का अभाव है,, जिसके कारण वे सुखी नही है |

2. इर्ष्या को अनोखा वरदान क्यों कहा गया है ?

उत्तर – इर्ष्या को अनोखा वरदान इसलिए कहा गया है ! क्योकि जिस मनुष्य के हृदय में इर्ष्या का वास हो जाता है ! वह उन चिझो से आनंद नहीं उठाता है ! जो उसके पास मौजूद होता है ! वह दुसरे को सुखी देखकर जलता रहता है ! वह हमेशा दूसरा का विनाश सोचता रहता है ! इसलिए वह खुद विनाश की पथ पर आगे बढ़ता है ! इसलिए इर्ष्या को अनोखा वरदान कहाँ गया है |

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Bseb Class 10 Non Hindi इर्ष्या तू न गई मेरे मन से

3. ईर्ष्या की बेटी किसे और क्यों कहा गया है ?

उत्तर – ईर्ष्या की बेटी निंदा को कहा गया है ! ऐसा इसलिए कहा गया है ! की जो हमेशा दुसरो की निंदा करता है ! ताकि वे लोगो के आँखों से गिर जाए ! और उसके द्वारा किया गया रिक्त स्थान प्राप्त हो जाए। Jawan

4. ईर्ष्यालु से बचने का क्या उपाय है ?

उत्तर – ईर्ष्यालु से बचने के लिए नीत्से ने कहा है,, की ऐसे ईर्ष्यालु लोग बाजार में मखियो के सम्मान है,, जो आकारण हमारे चारो ओर भिनाभिनाते रहते है,, और हमें कष्ट पहुंचाते है,, क्योकि उन्हें हमारे गुण का पता नहीं है,, इसलिए उन्हें छोड़कर एकांत की ओर भाग जाना चाहिए,, ऐसे लोगो का साथ छोड़कर हम ईर्ष्यालु से बच सकते है |

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5. इर्ष्या का लाभदायक पक्ष क्या हो सकता है ?

उत्तर – इर्ष्या का लाभदायक पक्ष यह हो सकता है,, की हमें अपने जैसे लोगो को प्रतिद्वंदी मानकर उनसे आगे बढने का प्रयास करे,, जब कोई व्यक्ति अपने आय एवं साधन के मुताबिक़ किसी से आगे बढने का प्रयास करता है,, तो यह इर्ष्या का लाभदायक पक्ष होता है,, इस में जलन या इर्ष्या के बदले स्पर्धा की भावना होती है |

6. अपने मन से इर्ष्या का भाव निकालने के लिए क्या करना चाहिए ?

उत्तर – अपने मन से इर्ष्या का भाव निकालने के लिए अपने मानसिक संतुलन रखना चाहिए,, हमें फाल्तुः बातो को सोचने की आदत छोड़ सेनी चाहिए,, जिसके अभाव के कारण हमें इर्ष्या होती है,, वैसे अभाव के पूर्ति का रचनात्मक तरीका अपनाने का प्रयास करना चाहिए,, जिससे इर्ष्या की पंक्ति घटने लगती है,, इसी उपायों के द्वारा हम अपने मन से इर्ष्या के भाव को दूर कर सकते है |

S.N Class 10th Non Hindi Subjective Notes
पाठ – 2 ईदगाह
पाठ – 3 कर्मवीर
पाठ – 4 बलगोबिन भगत
पाठ – 5 हुंडरू का जल प्रताप
पाठ – 6 बिहारी के दोहे
पाठ – 7 ठेस
पाठ – 8 बच्चे की दुआ
पाठ – 9 अशोक का शस्त्र त्याग
पाठ – 10 इर्ष्या तू न गई मेरे मन से
पाठ – 11 कबीर के पद
पाठ – 12 विक्रमशिला
पाठ – 13 दीदी की डायरी
पाठ – 14 पीपल
पाठ – 15 दीनबंधु निराला
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