Bseb Class 10 History समाजवाद एवं साम्यवाद

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Bihar Board Class 10th History Chapter 2 Samajwad Evm Samyavad

Chapter 2 : समाजवाद एवं साम्यवाद

1. पूंजीवाद क्या है ?

उत्तर – पूंजीवाद वैसा विचारधारा है | आथवा प्रवृति है | जिसमे उत्पादन तथा वितरण का कार्य पूंजीपतियों के द्वारा ही किया जाता है | अर्थात जिस देश में पूंजीपतियों का ही हर क्षेत्र में अधिकार हो वाही पूंजीवाद कहलाता है |

2. खुनी रविवार क्या है ?

उत्तर – 22 जनवरी 1905 को रूस की जनता अपने बाल – बच्चो के साथ रोटी दो का नारा लगाते हुए | जार निकोलस 11 के महल सेंटर पीटर्स वर्ग के तरफ से जा रहे थे | जब इस बात की सुचना मिलते ही राजा के द्वारा निहत्य मजदूरो पर गोलियों के बौछार करा दी गई | जिसमे हजारो मजदूर और उनके बाल – बच्चे ,मारे गए | यह घटना रविवार के दिन ही हुआ था | इसलिए इसे खुनी रविवार या लाल रविवार के नाम से जाना जाता है |

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3. अक्टूबर क्रांति है ?

उत्तर – 25 अक्टूबर 1917 को लेनिन अपने कार्यकर्ताओं के साथ पेट्रोग्राम के सभी बैंक , रेलवे स्टेशन, अस्पताल , कचहरी तथा स्कुल कॉलेजो पर आक्रमण करके अपने कब्जे में ले लिया | जानकारी मिलते ही वह के राजा नए बिना किसी प्रकार का विद्रोह किए हुए रूस के सत्ता को छोड़ दिया | यही घटना रूस में अक्टूबर क्रांति या नवम्बर क्रांति के नाम से जाना जाता है |

4. क्रांति के पूर्व रुसी किसानो की स्थिति कैसी थी ? वर्णन करे |

उत्तर – क्रांति के पूर्व रुसी किसानो की स्थिति काफी दयनीय थी | क्योकि उन लोगो को अपनी उपज का 1 बाटा 4 भाग राजा के खजाने में जमा कराना पड़ता था | राजा के कर की दर इतनी मंहगी थी | की किसान उसे पूरी करने में हमेशा तबाह रहते थे |

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5. रुसी क्रांति की निति हेतु कहाँ तक उत्तरदाई थी ?

उत्तर – जार निकोलस 11 द्वारा रुसी क्रांति की निति अपनाना महंगा पड़ा | क्योकि 4 लोगो के आक्रोश कम करने के लिए यह निति अपनाई थी | जबकि रूस के विभिन्न जातियों अपनी रक्षा के लिए क्रांतिकारियों का साथ देना शुरू कर दिया | इसलिए माना जाता है | की रुसी क्रांति की नीति महत्वपूर्ण योगदान दिया |

6. साम्यवाद एक नई आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था थी ? कैसे

उत्तर – साम्यवाद एक नई आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था थी | इसमें कोई दो राय नहीं है | क्योकि 1917 से पूर्व रूस से पहले किसी भी देश में यह व्यवस्था लागू नहीं की गई थी | जब पूरी दुनिया पूंजीवादी विचारधारा का समर्थक बनी हुई थी | उस समय रूस संवाद को अपनाकर किसानो और मजदूरों को विशेष अधिकार देना शुरू किया | फलतः रूस की आर्थिक व सामाजिक व्यवस्था दोनों ही बदल गई |

7. नई आर्थिक निति मार्क्सवादी सिद्धांतो के साथ समझौता था ? कैसे |

उत्तर – नई आर्थिक निति मार्क्सवादी सिद्धांतो के साथ समझौता इसलिए माना जाता है | की कार्ल मार्क्स हमेशा मजदूरों के लाभ की बात किया करते थे | जबकि लेनिन 1921 में नई आर्थिक निति अपनाया | उसमे मजदूर , किसान , और पूंजीपति तीनो के साथ लिए गए | लेनिन का मानना था | की तीनो कदम आगे चलकर एक एक कदम पीछे लौट आना ठीक नहीं है |

8. रुसी क्रांति के कारणों एवं परिणामो या प्रभाव की विवेचना करे ?

उत्तर – कोई भी क्रांति के कोई एक कारण नहीं होते है | बल्कि अनेको कारण होते है | ठीक उसी प्रकार रुसी क्रांति के भी अनेक कारण थे , जो इस प्रकार से है –

क. जार का अयोग्य होना :- 

रूस का जार एक अयोग्य शासक था | वह अपने राज्य में किसी भी प्रकार का सुधार नहीं किया | जिसके कारण जनता में असंतोष की भावना फ़ैल गई जो क्रांति का कारण बना |

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ख. राजा का निरंकुश होना :- 

रूस का राजा एक निरंकुश शासक था | वह अपने आपको ईश्वर का दूत समझता था | उसके मन में जो भी आता था | वह वाही काम करता है | वह हमेशा कहता था | की राजा ईश्वर का दूत होता है | इसलिए मेरे मुहँ से निकला हर शब्द ही कानून है | वह हमेशा मनमानी करता था | किसी के सलाह पर भी ध्यान नहीं देता था | जिसके कारण जानता में असंतोष की भावना फ़ैल गई | जो क्रांति का कारण बना |

ग. प्रशासनिक मनमानी :- 

राजा की प्रशासनिक व्यवस्था ठीक नहीं थी | और प्रशासन अपने मनमानी से काम करते थे | राजा प्रशासनिक व्यवस्था पर ठीक से ध्यान नहीं दिया | जिसके कारण राजा का प्रशासन पर से पकड़ कमजोर होता चला गया | जिसके कारण जानता नाराज हो गई | जो क्रान्ति का कारण बना |

घ. दरबार में चाटुकारों का आड्डा :- 

राजा का दरबार पूरा का पूरा चाटुकारों से भरा हुआ था | राजा चाटुकार के बहकावे में काम करता था | जिससे जानता में असंतोष की भावना फ़ैल गई | जो क्रांति का कारण बना |

ड. राज – काज में जरीना का हस्तक्षेप :- 

रूस के जार की पत्नी जरीना थी | जो राज – काज में हमेशा हस्तक्षेप करती थी | जरीना का यह हस्तक्षेप जानता को अच्छा नहीं लगा | जो क्रांति का कारण बना |

च. किसानो की दयनीय स्थिति :- 

राजा अपने राज्य में कृषि के क्षेत्र में किसी प्रकार का सुधार नहीं किया | जिसके कारण किसानो की स्थिति दिन – प्रतिदिन दयनीय होती चली गई | जो क्रांति का कारण बना |

छ. जरीना को पादारी के प्रभाव में होना :- 

रूस के राजा की पत्नी जरीना थी | जो एक पादारी के प्रभाव में थी | पादारी जरीना से आपना हर काम करवा लेता था | जरीना राजा को दबाव में डालकर पादारी का हर काम करवा लेती थी | जो जानता को पसंद नहीं आया | जो क्रांति का कारण बना |

ज. विदेशी घटनाओं का प्रभाव :- 

रूस के क्रांति का एक प्रमुख कारण विदेशी घटनाओं का प्रभाव भी था | विदेशी घटनाओं के प्रभाव में आकर | जानता राजा के खिलाफ हो गई | जो क्रांति का कारण बना |

झ. उधोग धंधो की कमी :- 

राजा अपने राज्य के उधोग क्षेत्र में किसी प्रकार का सुधार नहीं किया | जिसके कारण उधोग धंधे नष्ट होते चले गए | जिससे बेरोजगारी फ़ैल गई | जो क्रांति का एक कारण बना |

ञ. जापना से पराजय :- 

रूस जैसा बड़ा देश एक छोटा सा देश जापान से हार गया ! यह बेइज्जती जानता बर्दाश्त ना कर सकी ! जो क्रांति का कारण बना |

ट. रुसी क्रांति की निति :- 

रूस के राजा नए एक चर्च एक जार एक रूस का नारा लगाते हुए | एक निति बनाई | जिससे समाज के बहुत से वर्ग राजा के खिलाफ हो गए  ! जो क्रांति का कारण बना |

ठ. भुखमरी की समस्या :- 

राजा अपने राज्य में किसी प्रकार का सुधार नहीं किया ! जिसके चलते मजदुर बेरोजगार होते चलते गए ! जिससे भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई ! जो क्रांति का कारण बना |

ड. तत्कालिक कारण :- 

प्रथम विश्व युद्ध में रूस की हार तात्कालिक कारण मानी जाती है ! प्रथम विश्व युद्ध में रूस की हार नए जानता में विद्रोह फैला दिया ! जानता को अपनी राष्ट्र बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हुई ! यह काम आग में घी डालने का काम किया ! जिससे क्रांति आरम्भ गो गई |

9. रूस की क्रांति ने पूरे विश्व को प्रभावित किया किन्ही दो उदाहरणों द्वारा स्पष्ट करें ?

उत्तर – 1917 की रूसी क्रांति के प्रभाव काफी व्यापक और दूरगामी थे ! इसका प्रभाव ना केवल उस पर बल्कि विश्व कई देशों पर भी पड़ा | जो निम्नलिखित थे
. रूसी क्रांति के बाद विश्व विचारधारा के स्तर पर दो खेमों में बैठ गए |
. धर्म सुधार आंदोलन के पश्चात और साम्यवादी क्रांति के बावजूद यूरोप में वैचारिक स्तर पर इस तरह का विभाजन नहीं देखा गया था |
. रूसी क्रांति की सफलता ने एशिया और अफ्रीका में उपनिवेश मुक्ति का प्रोत्साहन दिया एवं इन देशों में होने वाले राष्ट्रीय आंदोलन का वैचारिक समर्थन प्रदान किया |

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10. हिंद चीन में फ्रांसीसी प्रसार का वर्णन करें ?

उत्तर – फ्रांसीसी कंपनी हिंदी चीन में प्रसार करने में सक्रिय था ! फ्रांसीसी व्यापारियों के साथ साथ पादरी भी इस क्षेत्र में आने लगे ! 1747 के बाद फ्रांस आने में रुचि लेने लगा किंतु अभी भी क्षेत्र में उसकी पकड़ कमजोर थी ! 19 बी शदी में इस क्षेत्र में फ्रांसीसी पादरियों की बढ़ती गतिविधियों के विद्रोह उग्र आंदोलन प्रारंभ हो गया ! जिससे फ्रांस को अपनी सैन्य शक्ति के प्रयोग का बहाना मिल गया ! उसने सैन्य शक्ति के आधार पर 1862 में अनाम की संधि के लिए बाध्य किया और 1863 में कंबोडिया तथा 1883 में तुर्की पर अधिकार प्राप्त कर लिया ! इस प्रकार 20 वी सदी की शुरुआत तक संपूर्ण क्षेत्र फ्रांस के नियंत्रण में आ गया |

11. कार्ल मार्क्स की जीवनी एवं सिद्धांतों का वर्णन करें ?

उत्तर – कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई 1818 को जर्मनी में राइन प्रांत के ट्रियर नगर में हुआ था | उनके पिता एनरिक मार्क्स एक प्रसिद्ध वकील थे ! जिनकी इच्छा थी कि कार्ल मार्क्स भी वकील बने | इसलिए 1836 में विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने हेतु भेज दिया | जहां से कार्ल मार्क्स के नए जीवन की शुरुआत हुई ! 1843 में बचपन के मित्र जेनी से विवाह कर लिया और 1844 में फ्रेंड रिक से उनकी गहरी मित्रता हुई ! दोनों ने मिलकर 1848 साम्यवादी घोषणा पत्र जारी कीजिए जिससे आधुनिक समाजवाद का जनक कहा जाता है ! 1867 मैं कार्ल मार्क्स दास कैपिटल नामक पुस्तक की रचना कीजिए | जिसको समाजवादियों का बाइबिल कहा जाता है ! कार्ल मार्क्स अपने जीवन में पांच सिद्धांत प्रस्तुत किए हैं” जो इस प्रकार से है |
. द्वंद्वात्मक भौतिकवाद का सिद्धांत
. वर्ग संघर्ष का सिद्धांत
. इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या
. मूल्य एवं अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत
. राज्य हीन एवं वर्ग हीन समाज की स्थापना

12. प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की हार ने ही क्रांति का रास्ता साफ कर दिया था | कैसे ?

उत्तर – प्रथम विश्व युद्ध में रूस की पराजय रूसी वासियों के लिए इतना अपमान जनक साबित हुआ ! कि जानता जार निकोलस द्वितीय से घिरना करने लगी ! सभी या सोचते थे कि हमारी सेना युद्ध में जा रही है ! जबकि राजा अपने महल में आराम कर रहा है ! ऐसे राजा को नहीं रहना ही बेहतर है ! फलत: प्रथम विश्व युद्ध में रूस की पराजय क्रांति का रास्ता साफ कर दिया |

13. यूरोपीयन समाजवादी के विचारों का वर्णन करें ?

उत्तर – यूरोपियन समाजवादियों में से सेट साइमा चार्ल्स हरदोई बाला का नाम प्रमुख है ! इन लोगों का विचार इस प्रकार है ! प्रथम यूरोपियन समाजवादी सेंट साइमन थे ! जिसका विचार था कि राजा और समाज को इस तरह संगठित करना चाहिए | कि लोग एक दूसरे का शोषण करने के बदले मिलजुल कर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करें ! प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करना चाहिए ! चार्ल्स पेरियार औद्योगिक विवाद का विरोधी थे उनका विचार था ! कि श्रमिकों को छोटे जो गांव में काम करना चाहिए ! तथा किसानों को विशेष सुविधा दी जानी चाहिए ! लुइ बाल लंबा का विचार था ! कि आर्थिक सुधार करने के लिए सबसे पहले इसे प्रभाव कारी बनाने के लिए राजनीतिक स्तर पर व्यापक सुधार होना चाहिए |

14. नई आर्थिक नीति क्या है ?

उत्तर – नई आर्थिक नीति लेनिन के द्वारा 1921 में अपनाई गई थी ! रूस के अंदर जब लेनिन का भी विरोध शुरू हुआ ! तो लेनिन अपनी नीति में कुछ परिवर्तन करते हुए रूसी जनता के पक्ष में कुछ निर्णय लिए जिससे नई आर्थिक नीति कहा जाता है ! इस नीति की प्रमुख बातें इस प्रकार से है –
. किसानों से अनाज लेने के बदले कर के रूप में एक निश्चित रकम निर्धारित की गई ताकि किसान अपनी अनाजों का इच्छा अनुसार उपयोग कर सके |
. सिद्धांत रूप से जमीन राज्य की रखी गई किंतु व्यवहारिक रूप से किसानों की हो गई |
. 20 से कम कर्मचारियों वाले उद्योगों को व्यक्तिगत उद्योग के रूप में चलाने का अधिकार दिया गया |
. उद्योगों का विकेंद्रीकरण हुआ |
. विदेशी पूंजी को सीमित मात्रा में आमंत्रित किया गया |
. व्यक्तिगत पूंजी तथा जीवन बीमा की शुरुआत हुई |
. ट्रेड यूनियन की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई |
. विभिनन स्तरों पर बैंक खोले गए |

Class 10th History Subjective Notes – इतिहास
पाठ – 1यूरोप में राष्ट्रवाद
पाठ – 2समाजवाद एवं साम्यवाद
पाठ – 3हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन
पाठ – 4भारत में राष्ट्रवाद
पाठ – 5अर्थव्यवस्था और आजीविका
पाठ – 6शहरीकरण एवं शहरी जीवन
पाठ – 7व्यापार और भूमंडलीकरण
पाठ – 8प्रेस-संस्कृति एवं राष्ट्रवाद

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