Naubat khane me ibadat । Bseb Class 10 Hindi नौबत खाने में इबादत

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Bihar Board Class 10th Hindi Chapter 11 naubat khane me ibadat – नौबत खाने में इबादत

Chapter – 11 नौबत खाने में इबादत
शीर्षक – नौबतखाने में इबादत
लेखक – यतीन्द्र मिश्रा
जन्म – 1977 में अयोध्या जिले के उतर प्रदेश में

लेखक परिचय :- नौबत खाने में इबादत पाठ के लेखक यतीन्द्र मिश्र जी है | इनका जन्म 1977 ई. में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था | यतीन्द्र मिश्र को राजिव गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार , रजा पुरस्कार , हेमत स्मृति कविता पुरस्कार ऋतुराज सम्मान मिला है

महत्वपूर्ण बिंदु

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  • नौबत खाने में इबादत का अर्थ – प्रवेश द्वार में बजने वाली मंगल ध्वनी है |
  • इबादत का अर्थ – उपासना है |
  • काशी सांस्कृतिक केंद्र कहा जाता है |
  • बिस्मिल्लाह खा शहनाई बजाते थे | वह शहनाई के पर्याय भी कहलाते है |
  • बिस्मिल्लाह खा को भारत रत्न पुरस्कार से नवाजा गया था |
  • बिस्मिल्लाह खा का जन्म डुमराव ( बिहार ) में हुआ था |
  • काशी में गंगा, बाबा विश्वनाथ , बालाजी का मंदिर है |
  • बिस्मिल्लाह खा मन्त्रत माँगते थे | की मेरा सुर ठीक रहे |
  • इस पाठ में मुहर्रम त्यौहार का जिक्र है |
  • बिस्मिल्लाह खा सुशिर वाध यंत्र बजाते है |
  • शहनाई नरकट ( एक प्रकार का घास ) से बनाया जाता है |
  • बिस्मिल्लाह खा के परदादा उस्ताद खान हुसैन डुमराव के निवासी थे |
  • मुहर्रम सिया मुसलमान हजरत इमाम हुसैन एवं उनके कुछ वंश जी के प्रति शौक के लिए मनाते है |
  • मोहर्रम के दिन बिस्मिल्लाह खा शहनाई नहीं बजाते थे |
  • काशी में मरना भी मंगल माना जाता है |
  • काशी आज भी संगीत के स्वर पर जगती है |
पाठ के साथ
1. डुमराव की महत्ता किस कारण से है ?

उत्तर – डुमराव में नरकट नाम का पौधा पाया जाता है | जिससे शहनाई बनाई जाती है | इसीलिए डुमराव की महत्ता अधिक है |

2. सुषिर वाध किन्हें कहते है’’ शहनाई शब्द की उत्पति किस प्रकार हुई है ?

उत्तर – शहनाई को सुषिर वाध काहा जाता है | इसे मुह से फुक मार कर बजाना पड़ता है | अरब देशो में शहनाई जैसी वस्तू को नथ कहकार बुलाया जाता है | शहनाई को वहां शाहनेय कह कर बुलाया जाता है | दक्षिण भारत में इसे शहनाई नाम से बुलाया जाता है | इस शब्द की उत्पति के विषय में कही सटीक जानकारी नहीं है |

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3. मुहर्रम पर्व में बिस्मिल्लाह खा के जुड़ाव का परिचय पाठ के आधार पर दे ?

उत्तर – मुहर्रम से बिस्मिल्लाह खा का जुड़ाव काफी घनिष्ट था | मुहर्रम का मतलब बिस्मिलाह का की शहनाई परन्तु मोहर्रम के दिन बिस्मिल्लाह खा के परिवार में कोई शहनाई नहीं बजाता था |

4. बिस्मिलाह खा जब काशी के बाहर प्रदर्शन करते थे, तो क्या करते थे ?

उत्तर – बिस्मिलाह खा जब काशी में प्रदर्शन करते थे तब वह काशी की और मुंह करके प्रणाम कर शहनाई बजाते थे | इससे हमें यह सिख मिलती है |की हमें अपनी जन्म और कर्म भूमि को नहीं भूलना चाहिए |

5. बिस्मिल्लाह खा सजदे में किस चीज के लिए गिर गिरआते थे ! इससे उनके व्यक्तित्व का कौन सा पक्ष उद्घाटित होता है

उत्तर – बिस्मिल्लाह खान सजदे में ईश्वर से प्रार्थना करते हैं! कि मेरे मालिक मुझे सूर बख्श दे जिससे सुनने वाले का मन मुग्ध हो जाए ! जिससे लोगों की आंखों में आंसू छलक है ! इससे अनेक व्यक्तित्व की संगीत के प्रति प्रेम उद्घाटित होती है ! उन्होंने कभी भी किसी चीज का लालच नहीं रहता था |

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6. संगीत में कचौड़ी क्या आप क्या अर्थ समझते हैं ?

उत्तर – संगीत में कचौरी का और हम यही समझते हैं ! कि शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान संगीत सागर में इतना डूबे थे ! की दुकान की तेल में डाली गई कचोरी की छन-छन आवाज उनके मन को मोह लेती थी |

7. बिस्मिल्ला खां का मतलब बिस्मिल्लाह खां की शहनाई एक कलाकार के रूप में बिस्मिल्ला खां का परिचय पाठ के आधार पर दें ?

उत्तर – बिस्मिल्लाह खा एक महान शहनाई वादक बिस्मिल्ला खां का मतलब बिस्मिल्लाह खां की शहनाई होती है ! इसका तात्पर्य यह है ! कि उनका हाथ और हाथ का मतलब फूंक और शहनाई सुनकर लोग भाव विभोर हो जाते थे ! बिस्मिल्लाह खान कलाकार के सारे गुण मौजूद थे |

8. आशय स्पष्ट करें
क. फटा सूरनाम बक्से लूंगीया का क्या है ! आज फटी है तो कल सील जाएगी ?

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति हमारे पाठ्य पुस्तक हिंदी पाठ के नौबत खाने में इबादत शीर्षक से लिया गया है ! जिसके लेखक यतींद्र मिश्र जी है ! लेखक इस पंक्ति के माध्यम से यह बताना चाहते हैं ! कि बिस्मिल्ला खां के गुण के समक्ष वेशभूषा चमक दमक फीके होते थे ! संसार में गुणवान व्यक्ति उमर हो जाता है ! जबकि बाहरी चमक दमक कभी न कभी समाप्त हो जाती है |

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9. काशी संस्कृति की पाठशाला है ?

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति हमारे पाठ्य पुस्तक हिंदी पाठ्य के नौबत खाने में इबादत शीर्षक से लिया गया है ! जिसके लेखक यतींद्र मिश्र जी है इस पंक्ति के माध्यम से लेखक या बताना चाहते हैं ! कि काशी अपने आप में सबसे अलग है ! काशी संस्कृति का संगम स्थल है ! यहां की संस्कृति एव्हरेस्ट की तरह ऊंचा स्थान पर स्थित है |

10. बिस्मिल्लाह खान के बचपन का वर्णन पाठ के आधार पर दें ?

उत्तर – बिस्मिल्लाह खान का जन्म डुमराव के एक संगीत प्रेमी परिवार में हुआ था ! 5 से 6 साल की उम्र में वे नाना के घर काशी चले गए थे ! वे संगीत के प्रति काफी रूचि रखते थे ! तथा वे शहनाई के एक महान वादक थे ! उनमें एक महान कलाकार के सारे गुण मौजूद थे |

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