vidyut dhara ke chumbakiye prabhav | विधुत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

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Bihar Board Class 10th Science Chapter 13 Vidyut dhara ke chumbakiye prabhav

पाठ – 13  विधुत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

1. चुम्बक से आप क्या समझते है ?

उत्तर – वैसा पदार्थ जो लोहे की वस्तुओ को पानी ओर आकर्षित करता है | उसे चुम्बक कहते है |

2. चुम्बक के उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव से आप क्या समझते है ?

उत्तर – चुम्बक का वह ध्रुव जो उत्तर दिशा की ओर संकेत करता है | उसे चुम्बक का उत्तर ध्रुव कहते है | चुम्बक का वह ध्रुव जो दक्षिण दिशा की ओर संकेत करता है | उसे चुम्बक का दक्षिण ध्रुव कहते है |

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3. चुम्बकीय पदार्थ और अचुम्बकिय पदार्थ क्या है ?

क. चुम्बकीय पदार्थ :- वैसे पदार्थ जिन्हें चुम्बक आकर्षित करता है | आथावा जिनसे कृत्रिम चुम्बक बनाए जा सकते है | उसे चुम्बकीय पदार्थ कहते है |
जैसे – लोहा, कोबाल्ट , निकेल आदि

ख. अचुम्बकिय पदार्थ :- वैसे पदार्थ जिन्हें चुम्बक आकर्षित नहीं करता है | उसे अचुम्ब्किये पदार्थ कहते है |
जैसे – कांच , कागज

4. विधुत – धारा चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है’’ कैसे ?

उत्तर – 1820 ई. में ओस्ट्रेड नामक वैज्ञानिक ने या पता लगाया की जब किसी चालक से विधुत धारा प्रवाहित की जाती है | तब चालक के चारो ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है |

विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव Class 10 Notes

5. चुम्बक क्षेत्र रेखाओं के गुणों को लिखे ?

उत्तर – चुम्बक क्षेत्र रेखाओं के गुण निम्नलिखित है –
. किसी चुम्बक के चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र – रेखाए एक संतत वक्र बंद है | और वे चुम्बक के उतरी ध्रुव से निकलकर दक्षिण ध्रुव में प्रवेश करती है | और पुनः चुम्बक के भीतर होती हुई उत्तरी ध्रुव पर वापस आ जाती है |
. ध्रुवो के समीप क्षेत्र – रेखाएँ घनी होती है | परन्तु ज्यो उनकी दुरी ध्रुवो से बढती जाती है | उनका घनत्व घटता जाता है |
. क्षेत्र रेखा के किसी बिंदु पर खिंची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर उस क्षेत्र की दिशा बताती है |
. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक दुसरे को नहीं काटती है |

6. मैक्सवेल के दक्षिण हस्त के नियम को लिखे ?

उत्तर – मैक्सवेल का दक्षिण हस्त के नियम चुम्बकीय क्षेत्र के दिशा की जानकरी देता है | जो इस प्रकार से है –
यदि धारावाही तार को दाएं हाथ की मुट्ठी में इस प्रकार पकड़ा जाएँ की अगूंठा धारा की दिशा की ओर संकेत करता है | तो हाथ की अन्य अंगुलियाँ चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा व्यक्त करती है |

7. विधुत चुम्बक से आप क्या समझते है ?

उत्तर – जब तक परिनालिका में धारा प्रवाहित होती रहती है | तब तक वह च्म्ब्क जैसा व्यवहार करता है | परंतु जैसे ही धारा का प्रवाह बंद कर दिया जाता है | उसका चुम्बकत्व नष्ट हो जाता है | इस प्रकार के चुम्बक को विधुत चुम्बक कहते है |

8. फ्लेमिंग के वाम हस्त के नियम लिखे ?

उत्तर – चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाली बल की दिशा फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम द्वारा जानी जा सकती है | जो इस प्रकार से है –
यदि हम अपने बाएँ हाथ की तीन अंगुलियों माध्यमा , तर्जनी तथा अंगूठे को परस्पर लंबवत फैलाएं यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा तथा माध्यमा धारा की दिशा को दर्शाता है | जब अंगूठा धारावाही चालक पर लगा बल की दिशा को व्यक्त करता है |

9. विधुत जनित्र से आप क्या समझते है ?

उत्तर – एक ऐसा यंत्र जिसके द्वारा यांत्रिक उर्जा को विधुत उर्जा में परिवर्तित किया जाता है | उसे विधुत जनित्र कहते है |

विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव प्रश्न उत्तर

10. विधुत चुम्बकीय प्रेरणा से आप क्या समझते है ?

उत्तर – जब कभी कुंडली और चुम्बक के बिच आपेक्षिक गति होती है | तब कुंडली में विधुत धारा प्रेरित होती है | इस प्रभाव को विधुत चुम्बकीय प्रेरण कहते है |

11. दृष्टि धारा और प्रत्यावर्ती धारा से आप क्या समझते है ?

क. दृष्टि धारा :- यदि धारा का प्रवाह एक ही दिशा में प्रवाहित होता है | तब उसे दृष्टि धारा कहते है | और इस जनित्र को डायनेमो कहते है |

ख. प्रत्यावर्ती धारा :- जब किसी विधुत परिपथ में धारा की दिशा रहती है | उसे प्रत्यावर्ती धारा कहते है |

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12. विधुत जनित्र की बनावट एवं क्रिया का सचित्र वर्णन करे ‘’ आथवा दृष्ट धारा डायनेमो की बनावट एवं क्रिया का सचित्र वर्णन करे ?

उत्तर – एक ऐसा यंत्र जिसके द्वारा यांत्रिक उर्जा को विधुत उर्जा में परिवर्तित किया जाता है | उसे विधुत उर्जा या डायनेमो उर्जा कहते है | इस डायनेमो में विधुतरोधी त्ताम्बे के तार की कुंडली नरम लोहे के क्रोड़ पर लिपटी रहती है | इसे आर्मेचर कहा जाता है | इस कुंडली में एक शक्तिशाली चुम्बक जिसे क्षेत्र चुम्बक कहते है | तथा ध्रुवो के बिच रिक्त चुम्बक क्षेत्र में तेजी से घुमाया जाता है |
कुंडली के तार के दोनों छोर पर ताम्बे के विभक्त वल्ग जुड़े होते है | जो दो कार्बन प्रश से हल्के से स्पर्श करते है | ब्रश को इस तरह से व्यवस्थित किया जाता है | की जब कुंडली में धारा प्रवाहित की जाती है | तब उसमे विधुत उत्पन्न होता है |विभक्त वलय को प्रत्येक ब्रश से दुसरे ब्रश के साथ सम्पर्क बदलने के बिंदु पर ही होते है |

13. डायनेमो की बनावट क्रिया एवं सिद्धांत का वर्णन करे || आथवा प्रत्यावर्ती धारा डायनेमो की बनावट कार्य और सिद्धांत का सचित्र वर्णन करे ?

उत्तर – डायनेमो एक ऐसा यंत्र है | जिसमे यांत्रिक उर्जा को विधुत उर्जा में परिवर्तित किया जाता है | एक साधारण डायनेमो में शक्तिशाली नाल – चुम्बक होता है | जिसे डायनेमो का क्षेत्र चुम्बक कहते है | क्षेत्र चुम्बक के ध्रुवो के बिच क्षैतिज अक्ष पर धुर्नन करने वाली एक कुंडली होती है | जिसे डायनेमो का आर्मेचर कहते है |
आर्मेचर में कुंडली के अनेक फेरे होते है ! जो नरम लोहे की पट्टियों पर लिपटी रहती है ! इन लोहे की पट्टियों को आर्मेचर का क्रोड़ कहते है | आर्मेचर का तार ताम्बे का होता है ! इनके दोनों छोर पर पीतल की विलेय लगे होते है | इन वलयो से कार्बन की पत्तियाँ हल्का स्पर्श करती है | इन पटियों को ब्रश कहा जाता है |
डायनेमो का उपयोग कारखानों में मशीनों के लिए उर्जा प्राप्त करने में होता है ! और बिजली घरो में इसकी व्यवस्था करके लोगो को विधुत आपूर्ति की जाती है |

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14. एक चित्रण द्वारा विधुत मोटर का कार्य विधि के सिद्धांत को समझाएँ ?

उत्तर – विधुत मोटर में एक शक्ति शाली नाल चुम्बक होती है ! जिसे क्षेत्र चुम्बक कहते है ! इसके अवतल ध्रुव खंडो के बिच ताम्बे के तार की कुंडली होती है ! जिसे मोटर का आर्मेचर कहते है | आर्मेचर के दोनों छोर पीतल के खंडित वलयो से जुड़े होते है ! वलयो को कार्बन के ब्रशो द्वारा हल्के से स्पर्श करते है ! जब आर्मेचर से धारा प्रवाहित की जाती है ! तब क्षेत्र चुम्बक के चुम्बकीय क्षेत्र के कारण कुंडली के AB तथा CD भुजाओं पर समान के मान के किन्तु विपरीत दिशाओं में बल लगाते है ! जिसके कारण आर्मेचर की दुरी पर यदि ब्लेड लगा दी जाए तो मोटर विधुत पंखा बन जाता है ! ध्रुवी में पट्टी लगाकर मोटर के द्वारा मशीने चलाई जाती है |

15. विधुत चुम्बक की रचना सचित्र समझाएँ ?

उत्तर – विधुत चुम्बक एक ऐसा चुम्बक है ! जिसमे चुम्बकत्व उतने ही समय तक विधमान रहता है ! जितने समय तक परिनालिका में विधुत धारा प्रवाहित होती रहती है ! प्रायः एक नरम लोहे के छड को एक परिनालिका में रखकर विधुत चुम्बक बनाया जाता है ! नरम लोहे को आसानी से चुम्बकीय किया जा सकता है ! जब परिनालिका में धारा प्रवाहित की जाती है ! तब उसमे चुम्बी क्षेत्र उत्पन्न होते है ! जिसके कारण लोहा का छड शक्ति शाली चुम्बक बन जाता है | जब धारा का प्रवाह बंद कर दिया जाता है ! तब नरम लोहा अपना चुम्बकत्व खो देता है ! परिनालिका में इस प्रकार से रखे गए छड को क्रोड़ कहा जाता है ! चुम्बक के चुम्बकत्व की तीव्रता निम्नलिखित बातो पर निर्भर करती है |

क. परिनालिका में फेरो की संख्या :- यदि तार के फेरो की संख्या अधिक होगी तो चुम्बकत्व अधिक होगा |

ख. विधुत – धारा का परिमाण :- प्रवाहित होने वाली विधुत – धारा का परिमाण जितना अधिक होगी | चुम्बकीय क्षेत्र उतना ही प्रबल होगा |

ग. क्रोड़ के पदार्थ की प्रकृति :- परिनालिका में नरम लोहे के क्रोड़ का व्यवहार करने पर चुम्बकीय अधिक होता है |

16. फैराडे के उस प्रयोग का वर्णन करे’’ जो विधुत मोटर में सिद्धांत पर प्रकाश डालता है ?

उत्तर – कांच की एक मोती नली ली जाती है ! उसके निचले सिरे पर कार्फ लगा होता है ! जिसके बिच से एक छड चुम्बक को लगा दिया जाता है ! चुम्बक के ध्रुव से थोडा निचे तक पारा भर दिया जाता है ! नाली के उपरी छोड़ पर कार्फ लगा दिया जाता है ! उसके बिच से ताम्बे की छड को लगा दिया जाता है ! इस छड के निचले भाग में बना रहता है |

जिसके एक दूसरी सीधी छड को इस तरह लटका दिया जाता है ! की इसका निचला सिरा पाटे में डूब जाएं ! निचे से पारे में लगा बैट्री प्लाग कुंजी परिबर्तनशील प्रतिरोध को श्रेणीक्रम में रखते हुए ऊपर के छोड़ पर लगी कारफ द्वारा जोड़ दिया जाता है ! पलँग कुंजी बंद करते ही परिपथ पूरा हो जाता है ! और उससे धारा पर्वाहित होने लगती है ! नाली के भीतर का तार चुम्बक के चारो ओर घूर्णन करने लगता है !

Bseb Class 10 Science विधुत धारा का चुम्बकीय प्रभाव Notes

17. शोर्ट सर्किट से आप क्या समझते है ?

उत्तर – विधुत परिपथ में ऐसी उपकरण जोड़ दी जाते है ! जो अधिक शक्ति लेते है ! और जिससे प्रबल धारा प्रवाहित होती है ! इस प्रबल धारा से वे गर्म हो जाते है | और इतना गर्म हो जाते है ! की वे जलाने लगाते है ! लाइनों की धारा का इस प्रकार बढने की घटना को अभितरण कहते है ! कभी – कभी विधुत आपूर्ति करते समय गर्म तथा ठंडा तार आपस में सट जाते है !

इससे परिपथ का प्रतिरोध भुत ही कम हो जाता है ! और उसमे धारा का प्रबल अत्यधिक हो जाता है ! इससे तार और इस परिपथ में जुड़े उपकरण बहुत ही गर्म होकर खराब हो जाता है ! परिपथ में धारा का इस प्रकार बढने की घटना को लघु-पथन कहा जाता है |

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18. घरेलू विधुत वायरिंग की संरचना का वर्णन करे ?

उत्तर – पावर हाउस या पावर स्टेशन से ट्रांसफोर्मर की सहायता से विधुत को विधुत पोलो या खम्भों पर लगे ताम्बे के दो मोटे तारो द्वारा घरो तक पहुँचाया जाता है ! इनमे एक विधुन्मय तार होता है ! जो लाल रंग के विधुत रोधी से ढका रहता है ! विधुत आपूर्ति से प्रत्यावर्ती धारा इसके द्वारा प्रवाहित होती है ! दूसरा उदासीन तार होता है ! जो काले रंग के विधुत रोधी पदार्थ से ढका होता है ! यह तार धारा को वापस पावर स्टेशन तक ले जाता है ! घरो में एक तीसरा तार भी होता है !

इस तार को घर के निकट पृथ्वी में काफी निचे मिट्टी में दबी धातु प्लेट से जुडा होता है ! जो सुरक्षा के लिए लगाए जाते है ! घरो में प्रायः अलग – अलग परिपथ बनाए जाते है ! 5a के उपकरण जैसे – बलब , ट्यूब , पंखा आदि ! चलाने के लिए तथा दूसरा 15a जिससे हीटर , रेफ्रीजरेटर आदि उपकरण के लिए लगाए जाते है |

19. विधुत परिपथ के लापरवाह व्यवहार या असावधानी से जान – माल की हानि होती है’’ क्यों समझाएं ?

उत्तर – हमारे घरेलू विधुत परिपथ में अभिभारण तथा अघुपथन के कारण हमारे घरो में आग लग जाती है ! आथावा विधुत परिपथ में खराब तारो के कारण तथा खराब स्विचो के कारण काफी जान – माल की हने होती है ! अतः इससे बचने के लिए विधुत परिपथ में सुरक्षा फ्यूज का व्यवहार किया जाता है |

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